विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदाम्पत्य प्रेम की अद्भुत कथा २६
राजा अज पत्नी वियोग में चिन्तित रहने लगे और अपने पुत्र
दशरथ को बालक समझकर उन्होंने शरीर को रखना (जीवित
रहना) उचित समझा। प्यारी सी इन्दुमती का चित्र देखने और
उसे स्वप्न में देखकर क्षणमात्र संयोग के आनन्द से जैसे तैसे
अज ने आठ वर्ष व्यतीत किये।
राजा अज ने अच्छी प्रकार सिखाये, धनुर्धारी कुमार
दशरथ को प्रजा की रक्षण विधि में शास्त्रानुसार उपदेश करके
स्वयं अपने शरीर को त्यागने की इच्छा से अन्नखाना छोड़ दिया।
राजा अज गगा और सरयू के जलों के सगम तीर्थ में
शरीर त्याग कर शीघ्र देवलोक मे जा, पहिले शरीर से अधिक
शोभायमान सुन्दरी भार्या के साथ फिर नन्दन वन के क्रीडा
मन्दिरों मे विलास करने लगे।
पिता के स्वर्गवास होने पर दशरथ ने राज्य किया। राजा
दशरथ महापराक्रमी यशस्वी धर्मिक उदार और सत्यवादी न्यायी
प्रजा पालक राजा हुए।
ऊपर के वर्णनों से इस बात का पता अच्छी तरह चलता है
कि वास्तव में दाम्पत्य प्रेम क्या है और उसका कितना महत्व है।
साथ ही यह पता चलता है कि दाम्पत्य प्रेम का असर सन्तान
पर कितना सुखकर पड़ता है। दाम्पत्य प्रेम में बधने वालों की
ही सन्तान हृष्ट पुष्ट सुन्दर स्वरूपवान और निरोग रहती है।
इसलिये नारी जाति के महत्व को समझते हुये प्रत्येक गृहस्थ को
सुदृढ़ दाम्पत्य प्रेम रखकर गृहस्थाश्रम का आनन्द लूटना चाहिये।