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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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दाम्पत्य प्रेम का प्रभाव ३१

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ही बना रहता है। जो अज्ञानी पुरुष स्त्री को विषय वासना की तृप्ति
का खिलौना समझते हैं वे बड़ी भारी भूल करते हैं। वे परमात्मा
के बनाये नियमों के विरोधी हैं और अपने इस अमूल्य मनुष्य
जीवन के शत्रु हैं।
इस समय देश में बहुतेरे लोग ऐसे वर्त्तमान हैं जो स्त्री को
केवल विषय वासना की तृप्ति के लिये ही समझकर उसका उचित
सत्कार नहीं करते, पैर की जूती समझकर उसका आदर नहीं
करते। परमात्मा ने स्त्री को पुरुषों के जीवन की रक्षा के लिये
उत्पन्न किया है। यदि स्त्रियां न होतीं तो यह ससार कुछ भी न
था। स्त्री बिना ससार के सभी सुख और ऐश्वर्य निरस और
फीके हैं। बल्कि यो कहना चाहिए कि सृष्टि का कारण स्त्री
जाति ही है।
स्त्री सृष्टि रूपी वाटिका की सर्वश्रेष्ठ फुलवाड़ी है, फुलवाड़ी
ही नहीं सुन्दर सुगन्धित फूल है। स्त्री से ही परमात्मा के
रचे हुए इस संसार की शोभा है। जिस घर में सुशीला स्त्री नहीं
है वह घर नरक यातना की समान दुःखदाई है और जिस घरमे
स्त्री नहीं है स्त्री से शून्य वह घर स्मशान से भी भयानक है। स्त्री
से ही घर इन्द्रपुरी का सा आनन्द और सुख देने वाला है। इसलिये
पुरुषों को यदि दाम्पत्य प्रेम का प्रभाव देखना है। उससे पूरा
आनन्द भोगना है तो स्त्री को विषय वासना की तृप्ति की ही
मशीन न समझें बल्कि जीवन यात्रा के लिये सर्वश्रेष्ठ सुख देने
वाली समझकर वेद शास्त्रो की आज्ञानुसार नियमानुकूल वर्त्तें।