विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसब प्रकार का ऐश्वर्य (सुख) होने पर भी तेरे बिना अज
का सुख यहीं पर आज समाप्त हो गया क्योंकि मेरे सब सुख
तेरे ही साथ थे ।
इस प्रकार शोक मे ग्रसित कोशलपति अज ने प्यारी स्त्री के
निमित्त शोक करके वृक्षो की शाखाओं को उनसे चूते हुए रस
के आंसुओ से रुदन कराया अर्थात् अज के विलाप को सुनकर
वृक्षो की शाखाओ से भी आसू टपकने लगे ।
वड़ी कठिनाई से, अनेक उपायों से राजा अज ने गोद से
इन्दुमती को छुडाया और उसी माला से उसका श्रृंगार कर
अगर चन्दन आदि की चिता बनाकर उसकी मृतक्रिया की ।
राजा अज को अपनी पत्नी इन्दुमती इतनी प्यारी थी कि
वह उसके साथ ही मरने को तैय्यार था परन्तु यह विचार कर
कि ससार कहेगा राजा अज विद्वान होकर भी स्त्री के पीछे मर-
गया इस कलक के भय से उसने अपने शरीर को अग्नि में न
जलाया, कुछ जीने की इच्छा या प्राणो के मोह से नही ।
राजा अज को इस प्रकार स्त्री के प्रेम में व्याकुल सुनकर
महर्षि वशिष्ठ जी ने अपने शिष्य को राजा अज को समझाने के
लिये भेजा क्योंकि वशिष्ठ जी यज्ञ कर रहे थे इसलिये स्वयं न
जासके । वशिष्ठ जी के शिष्य ने आकर राजा अज को बहुत
समझाया परन्तु उसके शोक को दूर न कर सका । बहुत समझाने
पर राजा अज ने कह दिया कि ऐसा ही करू गा । यह कह कर
अज ने वशिष्ठ के शिष्य को बिदा किया ।