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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 689

५०२ आनन्द मन्दिर
से समय कुसमय न देखकर विषयाग्नि की शान्ति मे ही लीन
रहते हैं वे अपनी अमूल्य जवानी को विषयाग्नि मे शीघ्र ही
भस्म करदेते हैं और समय के पहिले ही बुढ़ापे के चंगुल मे फस-
कर कष्ट और दुःखमय जीवन व्यतीत करते हैं ।
याद रखिये बुढ़ापा आकर फिर नही जाता और जवानी
जाकर फिर नही आती ।
"जवानी आनही सकती, बुढ़ापा जा नही सकता"
भर्तृहरि जी ने ठीक कहा है:—
व्याघ्रीव तिष्ठति जरा परितर्जयन्ती,
रोगाश्च शत्रु इव प्रहरन्ति देहम् ।
आयुःपरिस्रवति भिन्नघटादिवाम्भो,
लोकस्तथाप्यहितमा च रतीति चित्रम् ॥
अर्थात—वृद्धावस्था वाघिनी की समान जवानी को खालेने
के लिये सामने खड़ी है, सब रोग शत्रुओं की समान देहपर
दण्ड प्रहार कर रहे हैं, आयु (उम्र) प्रति दिन इस प्रकार
निकलती जाती है, जैसे कच्चे घडे से पानी निकलताजाय, तिस
पर भी मनुष्य जिसमे बुरा हो वही काम करते जाते हैं ।
प्रेस की प्रार्थना
पुस्तक का यह प्रथम भाग "आनन्द मन्दिर" अब समाप्त
होरहा है इसका दूसरा भाग शीघ्रही तैय्यार होगा । यहां हम