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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 688

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ५०१

एक पत्नी कात्यायनी तो अपने हिस्से के वस्त्राभूषण सम्हालने
मे लगी, आभूषणो की देख रेख मे मग्न हुई पत्नी को पति के
वन जाने का अर्थात् विछोह का कुछ भी ख्याल न रहा, परन्तु
दूसरी पत्नी मैत्रेयी जो पति के प्यार का मूल्य समझती थी उसने
उन बहुमूल्य आभूषणों की ओर देखा भी नही और हाथ जोड
कर पति के सामने खडी होकर प्रार्थना करने लगी कि हे प्राण-
नाथ ! प्राणधन !! इस झूठे धन को लेकर मैं क्या करूंगी क्या
इस धन से मुझे शान्ति मिल जायगी ? क्या आप तत्वदर्शी
विद्वान होकर भी यह नहीं जानते कि स्त्री के लिये पति से बढ़-
कर ससार मे दूसरा कोई धन नहीं है जब पत्नी के प्राणो का
धन पति ही छूट रहा है तो यह ससार के बहुमूल्य आभूषणो
को लेकर ही मै क्या करूंगी मेरे लिये अब संसार का कोई
अधिक से अधिक बहुमूल्य पदार्थ प्रसन्न नहीं कर सकता यह
सब व्यर्थ है मै भी आपके साथ चलूंगी ।
पति पत्नी मे सच्चा प्रेम हो तो उत्तम सुन्दर सुशील माता
पिता की आज्ञा कारिणी सन्तान उत्पन्न होती है इस विषय को
आनन्द मन्दिर के दूसरे भाग मे विस्तार से पढ़िये ।

जवानी और बुढ़ापा

स्त्री हो या पुरुष जवानी की अवस्था मे मदान्ध होकर
बुढापे को भूल न जाना चाहिये बुढ़ापा बुरा होता है इस लिये
ऐसे उपाय और साधन काम मे लाने चाहिये जिससे बुढ़ापा शीघ्र
न आघेरे क्योंकि जो मनुष्य नियम पूर्वक नहीं रहते मदान्धता