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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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३६ भूमिका
सहतां हतजीवितं मम,
प्रबलामात्मकृतेन वेदनाम् ॥
यह मेरा नष्ट जीवन यदि प्यारी के पीछे चला गया था तो
फिर किस निमित्त लौट आया अब अपने कर्मों का प्रबल दुःख सहे।
इन्दुमती के मरते ही राजा अज भी मूर्छित हो गया था
परन्तु सेवकों ने पंखा आदि उपायो से उसे सचेत किया इसी
लिये वह कह रहा है कि मैं तो प्यारी के साथ ही चला गया
था फिर क्यों लौट आया ।
मनसापि न विप्रियं मया,
कृतपूर्वं तव किं जहासि माम् ।
ननु शब्दपतिः क्षितेरहं,
त्वयि मे भावनिबन्धना रतिः ॥
राजा अज फिर कहता है—मैंने पहिले कभी मन से भी तेरा
अप्रिय कार्य नहीं किया फिर तू मुझे क्यो त्यागती है, पृथ्वीपति
तो मै नाममात्र से हूँ मनकी प्रीति तो तुझ मे ही है ।
हे प्राण प्यारी ! फूलो से गुथी टेढी काली अलको को कंपा-
कर वायु मेरे मनको तेरे लौट आने को आशावान बनाती है ।
हे प्राणेश्वरी ! मेरी बात सुन, रात्रि चन्द्रमा को फिर भी
मिलती है, चकवे को चकवी फिर मिलती है इस कारण वह दोनो