विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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दांपत्य प्रेम की अद्भुत कथा २५
कथमेकपदे निरागसं,
जनमाभाष्यमिमं न मन्यसे॥
राजा अज पागल की समान उस मरी हुई अपनी प्राण
प्यारी से कहने लगा—मेरे बहुत अपराध करने पर भी जब तूने
मेरा तिरस्कार नहीं किया फिर अब एकाएकी अपराध रहित
अर्थात् बिना अपराध किये ही इस जन (मुझ) को बोलने के
योग्य क्यों नहीं समझती कि मुझसे बोले। इस प्रकार राजा
अज अपनी प्राण प्यारी स्त्री के वियोग में नाना प्रकार से विलाप
करते हुए कहता है:—
ध्रुवमस्मि शठः शुचिस्मिते,
विदितः कैतववत्सलस्तव ।
परलोकमसंनिवृत्तये,
यदनापृच्छ्य गतासि मामितः ॥
हे उज्ज्वल हसने वाली ! तूने निश्चय ही मुझे कपट से प्यार
करने वाला शठ जाना इसी कारण मुझसे बिना पूछे ही तू
फिर न आने के लिये मुझे छोड़कर परलोक को चली गई।
दयितां यदि तावदन्वगा-
द्विनिवृत्तं किमिदं तया विना ।