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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 642

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४५६


को पढ़ कर इसे भलीभांति समझेंगे और उस पर विचार करेंगे
तथा दूसरों को भी उपदेश करेंगे जिससे अन्य मूर्ख कामान्ध बूढ़े
यदि आगे को अपना जीवन सुखमय बनाना चाहें तो बुढ़ापे में
कदापि विवाह न करें ।
कई वर्ष व्यतीत हुए एक सेठ जी ने अपनी स्त्री को मेरे
पास इलाज के लिये भेजा। उस स्त्री की अवस्था अठारह वर्ष की
थी, उसे हिस्टीरिया, पागलपन हृदय की धड़कन और सिरकी
पीड़ा आदि रोग थे । जब वह मेरे पास आई उसकी माता साथ
में थी । मैंने उसे देखा, वह बडी हृष्ट पुष्ट स्त्री थी । उसे कोई
बीमारी की शिकायत देखने मे नही थी मैं उसे रोगी स्त्रियो के
देखने वाले कमरे में उसकी माता से अलग लेगई। मैंने उसकी सब
प्रकार से परीक्षा की । किसी प्रकार का गुप्त रोग भी नही था ।
तब मैंने उससे उसके पति की अवस्था पूछी पति की अवस्था
पूँछते ही उदास हो, नीचे को सिर करके बोली पचपन 'इतना
कहते ही उसे हिस्टीरिया का दौरा हुआ। मैने उसकी हालत देखी
वास्तव मे उसे इस समय बडा ही कष्ट था मैं उस स्त्री को उठवा
कर दूसरे कमरे मे लेगई और पलंग पर लिटाकर हिस्टीरिया शांत
करने के उपाय करके ठीक किया । मैंने उसकी माता को अलग
करके एकान्त मे उससे पूछा कि पति की अवस्था पूछने ही तुम
उदास क्यो हो गई, सच्चा हाल बतलाओ ।
उसने कहा—देवी जी ! क्या कहूँ, बडी लज्जा और दुःखकी बात
है । मेरे मूर्ख माता पिता ने कुछ देखा नही केवल धन देखकर