विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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लज्जित हो मुझसे कहा देवी जी आप ठीक कहती हैं, मेरे पति
किसी योग्य नहीं हैं। उनकी अवस्था पन्द्रह वर्ष की है, मेरी
अवस्था सत्ताईस वर्ष की है। तीन वर्ष विवाह को हुए, गौना
भी विवाह के साथ ही हुआ। कुछ दिनो तक तो सास ससुर ने
मेरे पास आने ही नहीं दिया। इधर डेढ़ वर्ष से पति मेरे पास
आते तो हैं किन्तु वे किसी योग्य नहीं हैं। मुझसे बोलते हैं परन्तु
मेरी इच्छा आज तक कभी नहीं हुई। मै यही नहीं जानती कि
स्त्री की इच्छा कैसे होती है। मेरे साथ की और स्त्रियां जब मुझे
मिलती हैं और इस विषय से बातचीत होती है, तब मुझे बड़ा
दु ख होता है। जब मै महीने से होती हूँ तब मेरी इच्छा कई
दिनों तक होती है, जब कभी पति से संभोग हुआ तब वे दो
चार मिनट मेरे पास रहे फिर सुस्त होकर सो रहते हैं। मै बेचैन
होजाती हूं। इसी शोक और चिन्ता से बेहोशी आ जाया करती
है। मेरा दस पांच दिन तक यही हाल रहता है।
जब प्रसंग होता है मुझे उस समय कुछ भी मालूम नहीं
होता केवल क्रोध और शोक ही से काम पड़ता है। इसी चिन्ता
का रोग है। जब इस विषय की अधिक चिन्ता करती हूं तभी
बेहोशी आजाया करती है। रात दिन बेचैन सी रहा करती हूं।
मेरे मूर्ख अन्धे मां बाप ने यह नहीं देखा कि जिसके साथ
लड़की का विवाह कर रहे हैं वह लड़की के जोड़ का तो हो।
यह कहकर वह स्त्री रोने लगी और मेरे सामने ही उसे
हिस्टीरिया का दौरा हुआ; उस समय मुझे उसके माता पिता और