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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 627

४४६ आनन्द सान्दर
और पुरुष वीस वर्ष की अवस्था मे वालिग होता है यह
शास्त्रकारो का मत है; परन्तु अव समय के अनुसार चौदह
वर्ष की स्त्री और अठारह वर्ष का पुरुष वालिग समझा
जाता है। यदि पति की अवस्था कम हुई और स्त्री की अधिक
तो वह प्रसंग ठीक नही कर सकता क्योंकि जव तक उसकी
अवस्था प्रसंग के योग्य होगी तव तक स्त्री की अवस्था और भी
अधिक हो जावेगी।
मेरे पास वनारस से एक स्त्री इलाज के लिये आई जिसकी
अवस्था २७ सत्ताईस दर्प की थी। उसे हिस्टीरिया (मूर्छा) रोग
था। देखने मे वह बहुत हृष्ट पुष्ट और सव प्रकार से आरोग्य
थी। साथ में उसकी सास आई थी। मैंने उसे देखते ही कहा तुम्हें
तो कोई रोग नहीं मालूम होता, तुम तो अच्छी खासी हो। तव
उसकी सास ने कहा कि मै इसे इसलिये लाई हूं कि विवाह हुए
तीन वर्ष हुए, अभी तक कोई वचा नहीं हुआ और न कभी गर्भ
ही रहा और इसे वेहोशी हो जाती है, सो इसे देखिये कि क्या
खरावी है मैंने उसकी नाड़ी देखी कोई रोग नहीं था। नाड़ी से
कोई रोग हो तो पता लगे तव मैं उसे एकान्त मे जहां स्त्रियो के
गुप्त रोगो की परीक्षा करती हू, ले गई। परीक्षा करने से भी किसी
प्रकार का कोई गुप्त रोग न पाया, तव मैने उस स्त्री से कहा
कि तुम्हें कोई रोग नहीं है; तुम यह वताओ और सव सच्चा हाल
कहो तुम्हारे पति मे तो कोई खरावी नही है। तुम तो निरोग हो
परन्तु तुम्हारे पति मे खरावी मालूम होती है। तव उस स्त्री ने