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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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४४४ आनन्द मन्दिर

यदि सन्तान हुई भी तो गर्भस्राव व गर्भपात का रोग लग जाता है
और लड़का पतोहू भी रोगी हो जाते हैं। इसका पता अभी किसी
को नहीं है, इसीलिये बाल्यावस्था में विवाह कर देने के बुरे परि-
णाम का पता नहीं है।
बीस वर्ष की अवस्था लड़के के विवाह के लिये जिन शास्त्र-
कारो ने कही है वह भी ठीक है, यदि पच्चीस वर्ष की अवस्था
तक न रहा जाय तो बीस वर्ष की अवस्था में सोलह वर्ष की
लडकी से विवाह करने से मेलका विवाह होगा।
आजकल कुसंगति के कारण तथा अनेक प्रकार के स्त्री
पुरुष के प्रेम सम्बन्धी उपन्यासो की शिक्षा के बुरे प्रभाव में
पड़कर लड़के लड़कियाँ बचपन में ही विवाह के उत्सुक होजाते
हैं, इस कारण समय देखकर माता पिता को भी विवाह करने
की जल्दी पड़जाती है, इसलिये सचमे जरूरी अब यह बात
रहगई है कि पति पत्नी स्वयं अपनी आरोग्यता और आरोग्य
सन्तान उत्पन्न करने के लिये नियम पूर्वक रति-क्रिया करके उत्तम
सन्तान उत्पन्न करे।
माता पिता को चाहिये कि लड़की का विवाह लड़के की
अवस्था देखकर करे। ड्योढी अवस्था न हो तो सवाई अवश्य होनी
चाहिये। जिस अवस्था में विवाह करने का शारदा एक्ट बना है यह
बहुत उचित है, यद्यपि शास्त्रकारों के मत से यह भी अवस्था छोटी
है परन्तु समय के देखते हुए ठीक ही समझना चाहिये। चौदह वर्ष
की लड़की और १८ अट्ठारह वर्ष का लड़का—लड़की से सवाई