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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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दाम्पत्य प्रेम की अद्भुत कथा २३
प्रतियोजयितव्य वल्लकी,
समवस्थामथ सत्व विप्लवात् ।
स निनाय नितान्तवत्सलः,
परिगृह्योचितमंकमङ्गनाम् ॥
तब चेतना दूर होजाने से बिना तार चढ़ी वीणा के समान
उस प्रिया को पति प्रेमी ने उठाकर अत्यन्त प्यार से गोदी
मे रखा ।
पतिरङ्क निषण्णया तया,
करणापायविभिन्न वर्णया ।
समलक्ष्यत विप्रदाविलां,
मृगलेखामुषसीव चन्द्रमाः ॥
पति की गोद मे रक्खी हुई, इन्द्रियो के अभाव से विपरीत
रंगवाली (प्यारी) से वह (अज) प्रात'काल मे मलिन मृगचिन्ह लिये
चन्द्रमा के समान दिखाई दिया ।
कुसुमान्यपि गात्रसंगमा-
त्प्रभवन्त्यायुरपोहितुं यदि ।
न भविष्यति हन्त साधनं,
किमिवान्यत्प्रहरिष्यतो विधेः ॥