विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४ भूमिका
जब फूल भी शरीर के संग से आयु का नाश करने को
समर्थ है तो खेद है कि मारने वाले दैव का साधन और कौन सी
वस्तु न होगी।
स्रगियं यदि जीवितापहा,
हृदये किं निहिता न हन्ति माम्
विषमप्यमृतं क्वचिद्भवे-
दमृतं वा विषमीश्वरेच्छया ॥
राजा अज बोला यदि यह माला ही जीवन को नष्ट करनेवाली
है तो हृदय पर रक्खी हुई मुझे क्यो नही मारती, कही विष भी
अमृत होजाता है और कही अमृत भी विष होजाता है।
अथवा मम भाग्यविप्लवा-
दशनिः कल्पित एष वेधसा ।
यदनेन तरुर्न पातितः,
क्षपिता तद्विटपाश्रिता लता ॥
राजा अज फिर कहने लगा, क्या मेरे खोटे भाग्य से विधाता
ने इस माला को वज्र कर दिया है जिसने वृक्ष को न मारकर वृक्ष
के आश्रित लता का नाश किया।
कृतवत्यपि नावधीरणा-
मपराद्धेऽपि यदा चिरं मयि ।