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सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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२२ भूमिका
के ऋतु वैभव का पराभव करके सती इन्दुमती के स्तनों के अग्र-
भाग पर गिरी ।
क्षणमात्र सखीं सुजातयोः,
स्तनयोस्तामवलोक्य विह्वला ।
निमिमील नरोत्तमप्रिया,
हतचन्द्रा तमसेव कौमुदी ॥
सुन्दर स्तनो वाली उस क्षणमात्र सखी को देखते ही राजा
अज की प्रिया राहु ग्रसे चन्द्रमा की चांदनी के सामन व्याकुल
होकर मर गई ।
वपुषा करणोज्झितेन सा,
निपतन्ती पतिमप्यपातयत् ।
ननु तैलनिषेक बिन्दुना,
सहदीपार्चिरुपैति मेदिनीम् ॥
इन्द्रियो के छोडे हुए शरीर से गिरती हुई उसने पति को भी
गिराया, जैसे टपकते हुए तेल की बूंद के सग दीपक की लव भी
धरती पर गिर पड़ती है ।
अपनी प्राणप्यारी पत्नी इन्दुमती के गिरते ही राजा अज
भी मूर्छित हो पृथ्वीपर गिर पडा। राजा की मूर्छा तो सेवको के अनेक
उपायो, पखे की वायु आदि से दूर होगई परन्तु रानी इन्दुमती
सदैव के लिये मूर्छित हो सोगई ।