विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४३४ आनन्द मन्दिर
रहते हुए भी अधिक प्रसंग करते हैं, महामूर्ख हैं। वे यह नहीं जानते कि जब बहुमैथुन के कारण हम बेकार हो जावेंगे, तो उस समय बिलकुल ही इच्छा पूरी न कर सकेंगे।
इसलिये नियमपूर्वक सभोग करना ही स्त्री पुरुष दोनों के लिये प्रसन्नता और आनन्द की बात है, क्योकि नियमपूर्वक सम्भोग करने से दाम्पत्य-प्रेम और विवाह का आनन्द भी मिलता है और सन्तान भी उत्तम और आरोग्य होती है। अधिक विषय से स्त्री पुरुष दोनो ही क्षय तपेदिक आदि भयंकर रोगों मे ग्रसित होजाते हैं। शरीर का सार वीर्य है। रुधिर की सौ बूंदों के समान वीर्य की एक बूंद होती है। यह ऐसा अनमोल रत्न है जिससे बहुमूल्य शरीर उत्पन्न होता है। इसे बरबाद करके शरीर का सत्यानाश मारना कैसी मूर्खता है।
आनन्द-वर्द्धक प्रसंग
जिस प्रसंग के पश्चात आनन्द आवे, शरीर मे स्फूर्ति हो, स्त्री पुरुष दोनो का चित्त प्रसन्न हो, और शरीर मे नूतन शक्ति ज्ञात हो, शरीर अधिक फुरतीला और परिश्रम करने योग्य मालूम हो, प्रसंग के बाद सुस्ती और उदासी न मालूम हो, बल्कि थोड़ी देरी मे शक्ति और इन्द्री मे उत्तेजना मालूम हो, तो यह समझना चाहिये कि सम्भोग स्वास्थ्य के नियमानुसार हुआ है। स्त्री पुरुष दोनो मे यह बाते मालूम होनी चाहिये।
यदि सम्भोग के पीछे थकान और शिर का भारीपन अनुभव