विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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पुरुष के साथ उसकी स्त्री की भी चिट्ठी आती है। स्त्री भी प्रदर
रोग तथा मासिकधर्म की खराबी से दुःखी है। पाठक पाठिकाओं
विचारिये तो सही लोग कैसी अज्ञानता करते हैं, अपने तथा स्त्री
के शरीर का किस प्रकार सत्यानाश कर रहे हैं। धिक्कार है इस
आनन्द को जिससे पति पत्नी दोनों रोगी और निर्बल हो जाते हैं
और फिर उसी आनन्द के लिये रोया और पछताया करते हैं।
स्त्रियों के पत्रों से मालूम होता है कि युवा पुरुष मासिक
धर्म्म के दिनों में तथा प्रसूतावस्था में भी मूर्खतावश प्रसंग करते
हैं, और स्त्री की आरोग्यता का कुछ भी ध्यान नहीं रखते । यह
कैसी अज्ञानता है और पत्नी के साथ कैसा अत्याचार है ।
कितनी ही युवती स्त्रियां मेरे देखने में आई हैं और प्रति
दिन आया करती हैं। वे अपने पति के रोगों की भी दुःखद कहानी
सुनाया करती हैं, जिसे सुनकर शोक होता है कि विषय की अज्ञा-
नता से कितने ही विवाहित जोड़ों का जीवन तबाह और बर-
बाद हो गया है और हो रहा है।
कोई कोई घमंडी लोग इस मूर्खता के कारण बहुमैथुन
करते हैं कि कहीं हमारी स्त्री यह ख्याल न कर बैठे कि
हमारे पति में बल नहीं है। वे बड़े मूर्ख हैं, यह नहीं जानते
कि स्त्री को केवल गर्भाधान के लिये ही, ऋतु-स्नान के बाद
उचित सम्भोग की प्रबल इच्छा होती है; यह प्राकृतिक नियम
है। जो पति अपनी पत्नी से ऐसा समझ कर कि अधिक प्रसंग
न करने से, कहीं स्त्री सुस्त न समझ ले, यह समझ कर शक्ति न
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