विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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हो तो जान लेना चाहिये कि विना जरूरत के ही प्रसंग किया गया
है। पाठक विचार कर देखे कि कितने पुरुष ऐसे हैं जो इस
नियम का पालन करते हैं ? बहुत कम होगे । इसी कारण सैकड़ा
पीछे निन्नानवे स्त्री-पुरुषों को औषधियां सेवन करने की आव-
श्यकता होती है ।
उचित प्रसंग का दूसरा लक्षण यह भी है कि जब तक
सच्ची रुचि न हो, तब तक प्रसंग न करे। सच्ची रुचि वह है जो
विना स्त्री के साथ हंसे बोले और चित्त को विगाड़ने वाले अन्य
साधनों के बिना ही हृदय मे उत्साह और सम्भोग की इच्छा
उत्पन्न हो और सम्भोग करने के लिये व्याकुल कर दे ।
शास्त्र बतलाता है कि उत्तेजना कई कारणों से—प्रायः
कमजोरी से भी हुआ करती है। अज्ञानी पुरुष उस झूठी उत्ते-
जना को ही सच्ची उत्तेजना समझकर वीर्य का सत्यानाश कर
अपने चित्त की शान्ति करते हैं। वह झूठी उत्तेजना कमजोरी,
ज्यादः सुस्ती और अधिक उदासी प्रकट करती है ।
जब कि सम्भोग के पीछे सुस्ती और कमजोरी मालूम हो,
शिर में कुछ दर्द मालूम हो, तब वह निर्बलता का कारण है और
उसे बेजा विषयभोग समझना चाहिये । ऊपर लिखे विषय पर
विचार करने और ध्यान देने से पाठको को मालूम होगा कि
सैकड़ा पीछे निन्नानवे पुरुष विना सच्ची इच्छा के ही सम्भोग
करके अनेक प्रकार के रोगो मे ग्रसित हो रहे हैं।
मेरे पास प्रति दिन बीसो चिट्ठियां और ऐसे रोगी पुरुषो की