विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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बना देते हैं। ऊपर लिखे कारणों से पुरुष के जितने रोग हैं सभी
उत्पन्न होते हैं ।
चेतसोवातिहर्षेण व्यवायं सेवते तु यः ।
शुक्लं तु क्षीयते तस्य ततः प्राप्नोति संक्षयम् ॥
घोरां व्याधिमवाप्नोति मरणं वा स ऋच्छति ।
शुक्रं तस्माद्विशेषेण रक्ष्यमारोग्यमिच्छता ॥
एतन्निदानलिङ्गाभ्यामुक्तं क्लैव्यं चतुर्विधम् ।
अर्थात्—जो मनुष्य चित्तकी हर्षता से अत्यन्त मैथुन में
प्रवृत्त होता है अर्थात् अधिक स्त्री प्रसग करता है उसका वीर्य
अधिकता से क्षीण होजाता है और क्षयरोग उत्पन्न होजाता है
अथवा और भी घोर व्याधियो के होने के कारण वह पुरुष मृत्यु
के मुख मे प्रवेश करता है । इसलिये जो पुरुष वा स्त्री आरोग्यता
की इच्छा रखते हों उनको अपने वीर्य की सावधानी से रक्षा
करनी योग्य है । प्रमाण से अधिक मौज मे आकर क्षणिक
आनन्द के लिये विषय वासना के वशीभूत होकर वीर्य का
सत्यानाश न करे। वीर्य के ही आश्रय मनुष्य का बल है और
बलके आश्रय शरीर का जीवन है ।
याद रखने की बात
पुरुषो के सब रोगो का निदान व चिकित्सा रोग दूर होने