विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
पृष्ठ 611, कुल 704 में से
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४३२ आनन्द मन्दिर
के उपाय व औषधियां जो पुरुष अपने रोगों को आपही समझ
कर घर पर ही सरलता से बहुत कम मूल्य मे अपने हाथों तय्यार
कर रोगों को दूर कर सकते हैं वे दूसरे भाग में विस्तार पूर्वक
लिखी जायगी, जो मेरी लाखो बार परीक्षा की हुई हैं । लाखों
पुरुष जिनमे आराम हो चुके है ।
अनुचित मैथुन से हानि
बहु मैथुन के सम्बन्ध मे शास्त्रों में लिखा है कि तरुण पुरुष
और स्त्री का जब विवाह हो तथा स्त्री रजोधर्म मे शुद्ध हो तो
पुरुष केवल गर्भाधान के लिये सम्भोग करे। जब गर्भ रहजाने के
चिन्ह मालूम हों तब प्रसंग करना बन्द करदे । जब तक बालक
उत्पन्न होकर माता का दूध पीना न छोड़ देवे तब तक पुन. प्रसंग
नही करना चाहिये ।
बहु मैथुन इस प्रकार बढ़ा हुआ है कि जिसका वर्णन करना
असम्भव है । मेरे पास प्रति दिन रोगी पुरुषो की अनेक चिट्ठियां
आया करती हैं । प्राय चिट्ठियों मे यह लिखा होता है कि विवाह
होने के समय से कई वर्ष तक मैंने विलाना