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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 606

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४२७
बनाने में खर्च कर डालते हैं और इधर उधर से मनगढ़ंत प्रयोग
योनि संकोचन के अपनी पुस्तकों में लिखदेते हैं जिससे ऐसे
प्रयोगों से पुस्तक की बिक्री अधिक हो ।
वे पुस्तक बनाने वाले यह तो समझते ही नहीं कि किस
लिये यह प्रयोग काम में लाया जाना चाहिये। पुस्तक बनाने वालों
को स्वयं इस बात का ज्ञान नहीं है क्योंकि वे तो वैद्यक विषय में
बिल्कुल अज्ञान हैं। वे तो संग्रह करना जानते हैं, हानि लाभ का
उन्हें कुछ ज्ञान नहीं होता। किसी प्रकार पुस्तक बिके, यही ध्यान
रहता है।
उन पुस्तक बनाने वालों से अधिक अज्ञान वे हैं जो बिना
सोचे समझे ऐसे प्रयोगों को क्षणिक आनन्द के लिये काम में
लाकर अपना तथा अपनी प्यारी पत्नी का जीवन नष्ट करते हैं
क्योंकि बिना रोग के औषधियां काम में लाने से वे हानिकारक
होती हैं।
योनि संकोचन और पुरुष इन्द्री को बढ़ाने तथा स्थूल करने
वाली औषधियां बड़ी हानिकारक होती हैं। बिना रोग के भूल
कर भी काम में नहीं लानी चाहिये। जो पुरुष मूर्खता वश बिना
रोग के ही इन्द्री को बढ़ाने तथा स्थूल करने की औषधियां काम
में लाते हैं उनकी इन्द्री कुछ दिनों में बेकाम हो जाती है और
वे नपुंसक होजाते हैं।
जो पुरुष बिना जरूरत के ही स्तम्भन की औषधियों का
सेवन करते हैं उन्हें भी कुछ दिन बाद नपुंसकता आघेरती है फिर