विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४२५
महायोनि
विषमं दुःख शय्यायां मैथुनात् कुपितोऽनिलः ।
गर्भाशयस्य योन्यश्च मुखं विष्टम्भयेत् स्त्रियः ॥
असंवृतमुखा सार्तिरुच्छफेनास्रवाहिनी ।
मांसोत्सन्ना महायोनिः पर्य्यं वंक्षण शूलिनी ॥
इत्येतै लक्षणैः प्रोक्ता विंशतियोनिजा गदाः ॥
अर्थात्—विपरीत दुखदाई शय्या पर, विपरीत आसन से जो
स्त्री प्रसग किया जाता है उस से उस स्त्री की वायु कुपित होकर
गर्भाशय और योनि मुख को बिगाड़ देती है दूषित करके फैला
देती है । उसके गर्भाशय तथा योनि का मुख अधिक खुल जाता
है इसलिये योनि बड़ी हो जाती है, उससे झागदार रूखा पीड़ा
करता हुआ आर्त्तव निकला करता है। इस स्त्री के हड्डियों की सन्धि
अर्थात् जोड़ों मे और गर्भाशय तथा योनि मे प्राय. पीड़ा हुआ
करती है। यह महायोनि अर्थात् बड़ी योनि कहलाती है। जो
स्त्री के लिए अतिशय दुखदाई होती है।
ये ऊपर लिखे, अनेक प्रकार के योनि रोग स्त्रियो की अज्ञा-
नता और उनके पति की मदान्धता के कारण, अनियम आहार
विहार स्त्री प्रसंग आदि से उत्पन्न होते हैं, ऐसा आयुर्वेद मे ऋषियो
ने बतलाया है।