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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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२०. भूमिका
कुछ तुमको बू ये जानकी ये रास्ते जा मिली ॥
छाई हुई है वन में उदासी शिताव था ।
प्यारी है मेरे प्राणों की त ला जवाब था ॥
खूनी जिगर है शाहिदे गुलगू निकाव था !
दिलमें निशात शाखो में बनकर हिजाब था ॥
व्याकुल हूं मैं रमेश तेरे इस्तियाक में ।
जङ्गल की ख़ाक छानूगा तेरे फिराक में ॥
प्राचीन समय मे पति पत्नी में अत्यन्त गाढ प्रेम रहता था ।
धनी निर्धन राजा महाराजा सभी स्त्रियों के महत्व को समझते
थे । जब से लोग अज्ञानता वश विषयांध हो पत्नी के महत्व को
भूलकर स्त्री को केवल विषय भोग की मशीन समझकर विपरीत
रति करने लगे और विषय की लोलुपता मे अपने शरीर-स्वास्थ्य
को भूल गये तो उसका वही निश्चित परिणाम होने लगा कि
पति पत्नी दोनों रोगी होने लगे, शक्तिहीन हो रोगी और निर्बल
सन्तान उत्पन्न करने लगे इसका परिणाम यह हुआ कि
दाम्पत्य जीवन का सच्चा आनन्द और सुख जाता रहा । क्योंकि
जब स्त्री पुरुष दोनो रोगी रहते हैं और सन्तान भी रोगी तथा
दुर्बल होती है तो हृदय की प्रसन्नता जाती रहती है । प्रसन्नता
के नाश हो जाने से दाम्पत्य प्रेम का जो आकर्षण पति पत्नी
मे होना चाहिए वह नही रहता, उसका नाश होजाता है। पति
पत्नी प्रेम बन्धन से एक दूसरे से अन्य मनस्क हो जाते हैं ।