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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 567

३६२ आनन्द मन्दिर

बतलाते हैं । शहरो मे रहने वाली प्रायः पढ़ी लिखी स्त्रियां ऊपर
लिखे नियमो को ढकोसला बतलाती हैं। बड़ी लड़कियां और
अध्यापिकाए इसको बिल्कुल नही मानतीं मासिक धर्म के दिनो
मे भी पाठशाला जाया ही करती हैं ऋतुस्नान के बाद प्रथम पति
के दर्शनों की तो बात ही दूर है इक्केवाले, गाड़ीवाले, कोरी,
चमार सईसो तथा मोटर ड्राइवरो के दर्शन करती हैं ।
वे ऋतुधर्म के दिनो का कुछ भी विचार नही करती । यहां
तक देखा गया है कि शहरो की स्त्रियां भोजन बनाने इत्यादि का
भी कुछ विचार नही करती । धीरे धीरे इस विषय को लोग भूलते
ही जाते है । दो चार नही पचासो ऐसी स्त्रियो से मुझसे इस विषय
मे बातचीत हुई तो उन्होंने कहा कि अगर हम चार दिन
मासिकधर्म के दिनो मे भोजन न बनावे तो घर वालो को रोटी
का बड़ा कष्ट हो ।
शहरो मे जिनके घरो मे रोटी बनाने वाली नौकरानियां हैं
वे नौकरानियो को ऐसी दशा मे भी चार दिन की छुट्टी नही देती
अतएव नौकरानी मासिकधर्म होने पर भी बाबू जी के यहां
रोटी बनाने जाया करती है ।
जब यह दशा है तो सन्तान और सन्तानवाली दोनो
आरोग्य कैसे रह सकते हैं । इस प्रकार के विषयो पर बातचीत
होने पर स्त्रिया प्रायः विलायत की स्त्रियो का उदाहरण देती हैं ।
परन्तु उनके आरोग्यता सम्बन्धी अन्य नियमो का उन्हे पता ही
नहीं है । उनके यहां जिस विषय पर जो नियम हैं उनके विरुद्ध