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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 568

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३६३
वे कदापि नहीं चलतीं । उनके यहां के नियम यहां बतलाये
जावे तो पुस्तक बहुत बढ़ जायगी और विषय भी दूसरा हो
जायगा इस कारण इतना ही बतला देना बहुत है कि जिसके
देश और कुल परम्परा के जो नियम हो उसे उसी नियम पर
चलना चाहिये ।
पाश्चात्य देशो की स्त्रियां अपने रहन सहन, खान पान
आदि का अपने देश काल के अनुसार पूरा विचार रखती हैं ।
उन्हें अपनी आरोग्यता स्वस्थता और सुन्दरता का पूरा ध्यान
रहता है। इसके विपरीत भारतवर्ष की स्त्रियो की दशा बहुत
शोचनीय है । मुझे तो मालूम होता है कि यहाँ का पचानवे
प्रतिशत नारीसमाज आरोग्यता और स्वस्थता की आवश्यकता
ही नहीं समझता है । खान पान रहन सहन के नियमो के सम्बन्ध
मे पुरुष समाज ही बिलकुल बेखबर है फिर भला स्त्रियो का क्या
कहना मानो उनके लिये ईश्वर ने कोई नियम बनाए ही नही है।
हमारे देश की स्त्रियां और पुरुष अपने नियमों पर नही चलते
इसी कारण सैकड़ा पीछे निन्नानवे स्त्रियां और इतने ही पुरुष रोगी
होरहे हैं हमारे देश के बालको की भी रोगी संख्या अधिक है ।
विपरीत आसन से गर्भाशय भ्रंश
स्त्री निर्बल हो अथवा विपरीत और अनियम रतिक्रिया से
गर्भाशय निर्बल पड़गया हों तो उस निर्बलता की दशा मे विपरीत
रति से स्त्री का गर्भाशय बाहर निकल आता है। कुछ दिनो तक