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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३६१
ऋतुस्नाता स्त्री के पति दर्शन का कारण
पूर्वं पश्येदृतुस्नाता यादृशं नरमङ्गना ।
तादृशं जनयेत्पुत्रं भर्तारं दर्शयेदतः ॥
ऋतुस्नाता स्त्री के प्रथम पति का दर्शन करने का कारण
यह है कि ऋतुस्नान के बाद स्त्री जैसे मनुष्य को देखेगी वैसा ही
पुत्र उत्पन्न होगा इसलिये पहिले पति का ही दर्शन करे ।
इस विषय मे आयुर्वेद मे यहां तक बताया गया है कि यदि
पति उस समय न हो तो पति का चित्र देखे और पति का
ध्यान करे ।
देखिए अन्यत्र चित्र मे ऋतुस्नाता स्त्री पति का चित्र देख
रही है। यदि पति उसी नगर में हो कार्य वश घर मे उस समय
न हो, कचेहरी दफ्तर अथवा दूकान पर गया हो कही भी गया
हो तो ऋतुस्नाता एकान्त में उसके आने तक पति का ध्यान करे ।
(देखिये अन्यत्र चित्र मे ऋतुस्नान के बाद पत्नी लेटी हुई
अपने पति के ध्यान में पति के आने की राह देख रही है ) जब
पति बाहर से आजावे तब उसका प्रसन्न मुख से जैसा ऊपर
बतलाया गया है दर्शन करे । देखिये इसी विषय का तीसरा चित्र
जहां पति पत्नी खड़े हुए एक दूसरे को देख रहे हैं, किस प्रकार
स्नेह की दृष्टि से देखते हैं इस चित्र में चित्रकार ने यही भाव
दर्शाया है ।
आज कल के पाश्चात्य शिक्षा के विद्वान इन बातो को ढोंग