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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 551

३७८ आनन्द मन्दिर
भीतरी मस्सा के सम्बन्ध में
चित्रो को देखने से पाठको की समझ मे भलीभांति आजावेगा
कि जहां पर योनि मार्ग लिखा है वही पुरुष की इन्द्री संभोग के
समय योनिमार्ग से गर्भाशय के मुख के पास पहुँचती है और
वीर्य स्खलित होने के समय गर्भाशय के मुख से लग जाती है
तव पुरुष का वीर्य गर्भाशय के मुख मे जाता है । जव गर्भाशय
के मुख पर मस्सा उत्पन्न हो गया तो गर्भाशय का मुख खुल ही
नहीं सकता । यदि खुले भी तो मस्से के कारण पुरुष की इन्द्री
का मुख गर्भाशय के मुख से मस्से के कारण मिल नही सकता ।
इस रोग वाली स्त्री को भी सभोग के समय प्रसन्नता नही
होती। इन्ही कारणों से स्त्री गर्भ धारण नहीं करती और जव तक
यह मस्सा दूर न हो तव तक वन्ध्या रहती है ।
गर्भाशय के भीतर उत्पन्न हुए मस्से का चित्र देखने से इस
मस्से के कारण पुरुष का वीर्य गर्भाशय मे पहुँच तो जाता है
परन्तु शीघ्र ही बाहर निकल आता है। जव यह मस्सा
अधिक बढ जाता है तव स्त्री को समोग के समय कष्ट होता है
और उसे संभोग मे प्रसन्नता भी नहीं होती ।
अनेक स्त्रियो के गर्भाशय की परीक्षा करने से गर्भाशय के
मुख पर मस्सा देखा गया और बवासीर के मस्से की समान
गर्भाशय के मस्से से रक्त निकलते हुए देखा गया है ।
ऐसी रोगी स्त्रियो का रक्त प्रदर समझ कर बड़े बड़े