विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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चिकित्सको ने वर्षों इलाज किया परन्तु कुछ भी फायदा नहीं
हुआ, रक्त बन्द नही हुआ क्योकि उन चिकित्सा करने वालो ने
रोग समझा ही नही। मेरे पास ऐसी कई स्त्रियां आई जो कई
लेडी डाक्टरो का वर्षों इलाज करा चुकी थी उन्होने भी रक्त
प्रदर ही समझकर इलाज किया, जब कुछ फायदा नही हुआ
जब वे स्त्रियां इधर उधर की औषधि करके सब ओर से निराश
होगई तो मेरे पास आईं। मैने अपने देशी इलाज से रोग दूर
कर दिया। जिस प्रकार बवासीर के मस्से से रक्त कभी दस
बीस दिन बाद निकला करता है इसी प्रकार गर्भाशय के मस्से
से भी निकला करता है। इसलिये प्रायः चिकित्सक उसे मासिक-
धर्म्म की ही खराबी समझते है। क्योकि मासिकधर्म्म हो जाने पर
फिर दस पांच अथवा दस पन्द्रह दिन बाद मस्से से रक्त आने
का समय आया तो यही समझा गया कि मासिकधर्म्म फिर
हुआ। ऐसी स्त्रियां मेरे पास अनेक आईं कि जिन्हे महीने मे दो
दो तीन तीन बार मासिकधर्म्म होता था। यही समझकर उनका
इलाज अनेक चिकित्सको ने किया परन्तु वे रोग को समझ
नही सके।
जब वे स्त्रियां मेरे पास आईं और उनके गर्भाशय की
परीक्षा की तो मस्से का पता लगा। गर्भाशय मे मस्सा होने से
मासिकधर्म मे भी खराबी मालूम होती है क्योकि मस्से के
कारण रक्त रुक रुक कर धीरे धीरे निकलता है। इसी लिये
मासिक धर्म का रक्त खूब तेज और साफ नही निकलता है।