विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
पृष्ठ 526, कुल 704 में से
संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३५६
गर्भधारण
पीछे बतलाया गया है कि शुद्ध रज वीर्य तथा आरोग्य
जननेन्द्री वाले दम्पति ही उत्तम सन्तान उत्पन्न कर सकते हैं। यदि
रज वीर्य पत्नी अथवा पति किसी की जननेन्द्री मे खराबी
हुई हो तो गर्भधारण नही होता ।
मेरे पास लाखो स्त्रियां अपना इलाज कराने आईं इनमे
आधी से अधिक संख्या ऐसी स्त्रियो की पाई गई जो सन्तानहीन
थी। रोग की परीक्षा करने से बहुतों मे गर्भाशय की खराबी न थी
उनके पति का उन स्त्रियो की जबानी हाल मालूम हुआ कि पतियो
मे इन्द्री की सिथिलता शीघ्रपात और नपुंसकता आदि रोग
मौजूद हैं।
जब उनके पतियो से पत्र द्वारा पूछा गया तब मालूम हुआ
कि उन्होने अनियम वीर्य का सत्यानाश मारकर जननेन्द्री की शक्ति
को नष्ट कर डाला इस कारण वे सन्तान उत्पन्न करने के योग्य नही
रहे। उनके पत्र तथा स्त्रियों की जबानी मालूम हुआ कि वे उचित
रीति से रतिक्रिया नही कर सकते क्योकि वे शक्तिहीन होगये हैं।
इसलिये गर्भधारण नही होता ।
जिनकी स्त्रियों मे कुछ खराबी नही थी पति मे खराबी थी
उनके पति का इलाज कर दिया गया सन्तान होने लगी और अब
तक हो रही है। इन बातो से उत्तम गर्भ होने का अन्दाज लग
सकता है।