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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 527

३६० आनन्द मन्दिर
स्त्रियों के जननेन्द्री दोष
लाखों स्त्रियो मे इलाज से उनके गुप्त रोगों की परीक्षा करके
जो रोग देखे गये और उन रोगो के उत्पन्न होने के कारणों की
खोज की गई तो स्त्रियो की जबानी तथा उनके पति के पत्रों से
मालूम हुआ कि स्त्रियो के गर्भाशय मे जितने रोग उत्पन्न होते हैं
वे सब प्रायः पतियों की अज्ञानता "अधिक विषय" और विपरीत
आसन से रतिक्रिया करने से उत्पन्न होते हैं।
पीछे स्त्री की जननेन्द्री सम्बन्धी अंगों का वर्णन किया गया
है यहा जननेन्द्री (गर्भाशय) का वर्णन किया जाता है। पुरुषों
की अज्ञानता से स्त्रियो के गर्भाशय मे नीचे लिखे रोग उत्पन्न
होते है जिनसे गर्भ नही रहता और जब तक ये रोग दूर न
हो स्त्रिया गर्भधारण नही कर सकती।
यदि गर्भ रहा भी तो निर्वल दुर्बल और कम आयु वाली
सन्तान उत्पन्न होती है तथा गर्भस्राव व गर्भपात की शिकायत हो
जाती है, इसी प्रकार के रोगो से स्त्रिया जीवन भर दुःखी रहा
करती हैं। मैने लाखो स्त्रियो का इलाज करके इस बात का
अनुभव प्राप्त किया है कि पतियों की अज्ञानता से ही स्त्रियो की
रोगी संख्या अधिक देखी जाती है।
अधिक और अनियम रतिक्रिया करने से गर्भाशय के वन्धन
ढीले होजाते हैं और नसो मे खराबी पहुँचने के कारण प्रदर,
मासिकधर्म्म की खराबी, गुल्म रोग उत्पन्न हो जाते है।