विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३४७
मैंने उस स्त्री के उस स्थान को देखा तो मालूम हुआ वह
स्थान स्पर्श करते करते इतना कठोर होगया था कि उस स्त्री को
इसके स्पर्श से कुछ मालूम ही नही होता था, उतनी जगह शून्य हो
गई थी ।
यह देखकर मैंने उससे पूछा—कभी तुम्हारे पति ने तुम्हारे
इस स्थान को हाथ से तो नहीं रगड़ा ? उसने कहा कि कभी की
क्या बात पूछती हो लगभग बीस वर्ष होगये जब से मेरा विवाह
हुआ तभी से मेरे पति जी इसी प्रकार मेरी इच्छा करके तब
सम्भोग करते हैं । जब तक वे हाथ से मेरी इच्छा न करे तब तक
मेरी इच्छा स्वप्न मे भी नहीं होती और मुझे कई वर्ष होगईं जो
प्रसन्नता पहिले विवाह के बाद कुछ दिन आरम्भ में होती थी वह
अब नहीं होती ।
मैंने उसका यह हाल सुनकर जवाब दे दिया कि तुम नपुंसक
होगईं । तुम्हारे अब सन्तान नहीं हो सकती । वह स्त्री रोने लगी
और पैरों पड़गई । मैने कहा इसका कोई इलाज नहीं हो सकता
तब वह रोकर अपने घर को चली गई । गर्भाशय की परीक्षा
करने से मालूम हुआ कि उस स्त्री का गर्भाशय भी सूखगया था वह
शक्तिहीन होगया था इसी कारण जवाब देदिया । गर्भाशय के
सूखजाने और इच्छा शक्ति नष्ट होजाने से स्त्री बन्ध्या होजाती है।
जो पुरुष अथवा स्त्रियां स्वयं इस अंग का हाथो से स्पर्शकर
अर्थात् घर्षण क्रिया करके स्त्री को उत्तेजित करके उसकी इच्छा
पूरी करते हैं अथवा स्त्रियां अपने हाथ से ऐसा करती हैं वे नपु-
सक होजाती हैं । उनकी उत्तेजना शक्ति नष्ट होजाती है इसलिये