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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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३४८ आनन्द मन्दिर
गर्भ नहीं रहता और उनको प्रसन्नता भी संभोग मे कभी नहीं
होती। इसका कोई इलाज नही हो सकता क्योकि प्राकृतिक
प्रसन्नता भी नष्ट हो जाती है और बिना स्पर्श के स्त्री की इच्छा
होती नही, सो भी जब बहुत देरी तक पुरुष हाथ से स्पर्श करता
रहे तब स्त्री की कुछ इच्छा होगी। तब तक पुरुष की इच्छा जाती
रहेगी क्योंकि जिन मूर्ख पतियो ने हाथ से इस स्थान का स्पर्श
करके स्त्री को उत्तेजित करके संभोग करने की आदत डाली है
उनने ऐसा इसी कारण किया है कि उनसे संभोग करके स्त्री को
उत्तेजित करने की सामर्थ नही होती।
जो मूर्ख पति ऐसा करते हैं उनकी स्त्रियो का जीवन तो
नष्ट होता ही है किन्तु पुरुष भी कुछ दिनो मे रोया करते हैं और
पछताते हैं। सम्भव है यह बात अभी तक किसी को कदाचित
मालूम न हो क्योकि जिन्हो ने अपनी पुस्तको मे इस अंग के
विषय मे लिखा है उन्होने केवल इतना ही लिखा है कि इस स्थान
के स्पर्श से स्त्री को बड़ा आनन्द आता है। यह बात उन्हे भी
नही मालूम है कि इस स्थान को स्पर्श करने से कितनी बड़ी
खराबिया उत्पन्न हो जाती है। उन्हे याद रखना चाहिये कि यह
स्थान हाथ से स्पर्श करने योग्य नही है।
इस दुष्ट स्वभाव से पुरुषो को बचते रहना चाहिये और
स्त्रियो को भी सावधान रहना चाहिये। जो इस पर ध्यान नही देगे
उन्हे जीवन भर रोना और पछताना पड़ेगा। उनका जीवन नीरस
हो जायगा जैसे कि ऊपर के उदाहरणों मे बतलाया गया है।