विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३३२ आनन्द मन्दिर
सासुन्दरी योषितमेवसूते,
साध्या भवेदल्परतोत्सवेषु ॥
दूसरी चान्द्रमसी ( चन्द्रमुखी ) नामक नाड़ी कामगृह मे
प्रधान होती है उस नाड़ी मे वीर्य पड़ने से वह स्त्री कन्या उत्पन्न
करती है और थोड़े ही सभोग से शीघ्र तृप्त होजाती है ।
गौरीतिनाडीयदुपस्थगर्भे-
प्रधान भूताभवतिस्वभावात् ।
पुत्रं प्रसूते बहुधाङ्गनासा,
कष्टोपभोग्यासुरतोपविष्टा ॥
अर्थात्—स्त्री की भग मे स्वभाव से प्रधान भूत ऐसी गौरी
नामक नाड़ी है उसमे वीर्य पड़ने से वह स्त्री बहुधा करके पुत्र
उत्पन्न करती है और संभोग के समय बड़ी कठिनाई से उत्पन्न
होती है ।
इन तीनो नाड़ियो का मुख क्रमशः खुलता रहता है सम
दिनों मे अर्थात् मासिक धर्म के चौथे छठे, आठवे, दसवे और
बारहवे दिन गौरी नामक नाड़ी का मुख खुलता है यदि उससे वीर्य
ग्रहण करके गर्भधारण हो गया तो उससे पुत्र उत्पन्न होता है ।
ऋतु के दिनों मे अर्थात् पांचवे सातवे नवे ग्यारहवे और
तेरहवे दिन चान्द्रमसी नाड़ी का मुख खुलता है उसके मुख
में वीर्य पड़ने से कन्या का गर्भधारण होता है और इसके बीच