विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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में कई तिथियां संभोग के लिये वर्जित हैं। इनमें समीरण नामक
नाडी का मुख खुला रहता है इसमे वीर्य जाने से गर्भाशय में
नहीं ठहरता, थोड़ी देरी में अथवा एक दो दिन मे बाहर निकल
आता है। इसी कारण ऋषियों ने गर्भाधान के लिये तिथियां
नियत की हैं और जिनमे गर्भ नहीं रहता वीर्य व्यर्थ जाता है उन
तिथियो में सभोग करना मना किया है।
स्त्री की जनेन्द्री तथा अन्य अवयव
सभोग तथा गर्भाधान क्रिया करने के पहिले स्त्री पुरुष दोनों
को जनेन्द्री तथा उसके अन्य अवयवो का हाल जान लेना पर-
मोपयोगी है। इसके न जानने से अनेक प्रकार के रोग पति पत्नी
मे उत्पन्न होजाते हैं और दाम्पत्य प्रेम का जैसा चाहिये आनन्द
नहीं मिलता क्योंकि रोगों के कारण दाम्पत्य प्रेम का सुख
नष्ट हो जाता है।
देखिये चित्र नं० २ मे न० १ कामाद्रि—यह योनि का ऊपरी
हिस्सा है जब कन्या की युवावस्था आरम्भ होती है तब पहिले
इस हिस्से मे बाल उत्पन्न होते हैं और जिस प्रकार युवावस्था
बढ़ती जाती है उसी क्रम से बाल घने होते जाते हैं। बाल आना
यह युवापन आरम्भ होने का चिन्ह है।
न० २ यह बडे भगोष्ठ हैं यह भग दर्वाजे के किवाड़ सम-
झना चाहिये। प्रकृति ने इन्हें ऐसा बनाया है कि बिना हटाये
हुए ये स्वय नही हटते। संभोग के समय इन दोनों भगोष्ठो
को हटाने से योनि मार्ग सम्भोग के योग्य होता है। जो मूर्ख