विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३२५
डाक्टर वैद्य हकीम आदि कोई चिकित्सक पुरुष रोगियों को यह
नहीं वतलाता कि तुम्हारे ही कुकर्मो का यह फल है । सम्भव है
चिकित्सक उन रोगियो से पूरा हाल पूछने की परवाह ही न
करता हो, उसे जरूरत ही क्या है, जो रोग समझ मे आया
औषधि दे दी । रोग की जड़ खोजने की परवाह ही क्या है, रोगी
भी नहीं समझता कि मुझे यह रोग किस कारण से है ।
मेरे पास जव रोगी स्त्रियां आती हैं तव मैं सबसे पहिले
उनके पति का हाल पूछती हूँ, वे सकोच न करके मुझसे
अपने पति का कुल हाल उस समय का जव से वह स्त्री विवाह
कर पति के घर आती है जितना हाल पति के शीघ्रपात प्रमेह
सुस्ती नपुंसकता आदि का होता है कह देती है। तव मैं उसके
पति से पत्र लिखकर सच्चा हाल पूछती हूं और अपने यहां
का रोगी फार्म भेजकर लिख देती हूं कि "आप सकोच न कर
अपनी कुल हालत लिखे जो जो आपने अज्ञानता अथवा वीर्य
सम्वन्धी भूल की हो । अगर आप कुछ वात छिपावेगे तो मेरी
कुछ हानि न होगी आपकी स्त्री का रोग दूर न होगा आपही को
फायदा न होगा"।
तव वे पुरुष अपना पूरा हाल बाल्यावस्था से हाल तक का
सच्चा लिखदेते हैं। मैं सव हाल मालूम कर उनकी वाल्यावस्था
की अज्ञानता से उत्पन्न हुई खराबियों का और पति की खराबियों
से स्त्री के उत्पन्न हुये रोगों का इलाज करती हूं। इस प्रकार स्त्री
पुरुष दोनो के रोग सदैव के लिये दूर होजाते हैं ।