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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 473

३२४ आनन्द मन्दिर

अब बाल्यावस्था से लेकर वृद्धावस्था तक किये हुये वीर्य नाश से उत्पन्न हुये रोगों के विषय के कुछ स्वानुभव लिखती हूं ।

बाल्यावस्था में किये हुए आहार विहार के अनियमों तथा कुटेवो हस्तक्रिया आदि से उस समय तो कुछ समझ में नहीं आता क्योंकि बाल्यावस्था में तो कुछ ज्ञान नहीं होता न कुछ हानि ही मालूम होती है किन्तु कुछ दिनों बाद उसके बुरे फल मालूम होने लगते हैं । इसलिये उन रोगों का बुरा परिणाम समझकर स्त्री पुरुष सब को ही सदैव पूरी तरह से उससे सावधान रहना चाहिए ।

मेरा तजुरबा

मुझे २५ पच्चीस वर्षे स्त्रियो की चिकित्सा करते व्यतीत हुईं । इस बीच मे मेरे पास लाखो ही स्त्रियां इलाज के लिये आईं और उनके पतियों की चिट्ठियां भी आईं । स्त्रियों की जबानी पतियो के शीघ्रपात सुस्ती प्रमेह सिथिलता और नपुंसकता का हाल मालूम हुआ तथा पुरुषो के पत्रो से मालूम हुआ और होरहा है कि बाल्यावस्था मे हस्तक्रिया अप्राकृतिक व्यभिचार आदि और अन्य प्रकार के कुकर्मों से प्रायः पुरुषों में अनेक खराबियां आगई हैं ।

जो कुछ कमी रहगई वह विवाह होते ही अधिक विषय के कारण पूरी होगई और होजाती है । पुरुष इसप्रकार जब बिलकुल शक्तिहीन होजाते हैं तब इलाज करने की , सूझती है परन्तु