सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

पृष्ठ 472, कुल 704 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 472

मंदाग्नि और प्रमेह तरुणों, के सखे सच्चे बने ।
श्रीहीन मुरझाए हुए जन, देख पड़ते हैं घने ॥३॥
जब नीव ही दृढ़ है नहीं, कैसे बनें मन्दिर भले ।
जब खोखली जड़ हो गई, कैसे विटप फूलें फलें ॥
फैला हुआ चहुँ ओर देखो, व्याधियों का जाल है ।
जिसको लखो अब तो वही, चलता कटीली चाल है ॥४॥
हा ! भीष्म से योधा भला, अब देश में होते कहां ?
मजनू बने लाखों पड़े है, देख लो अब तो यहां ॥
दाव मार की मारें मिरोरा, दे रही इस काल हैं ।
देखो हजारो छोकरे अब, प्रेम में बेहाल हैं ॥५॥
हा ! ब्रह्मचर्य्याभाव से, इस देश का जो हाल है ।
यदि आंख है तो देख लो, कैसा गिरा इस काल है ॥
बल, बुद्धि, विद्या अर्थ मे, ससार से पीछे पड़ा ।
हां, रूढ़ि भक्ती मूर्खता में, समझ लो सबसे बढ़ा ॥६॥
आर्य्यत्व का अस्तित्व यदि, रखना चहो संसार मे ।
फिर एक बार सुसभ्य हो, रहना चहो ससार में ॥
तो ब्रह्मचर्य पवित्र व्रत, धारण करो अति प्रेम से ।
भोगो सुखों का सार जो, जीवन निभाहो नेम से ॥७॥
अब आप लोग समझ गये होगे कि ब्रह्मचर्य का प्रभाव
कैसा अद्भुत है और ब्रह्मचर्य न रखकर वीर्य को व्यर्थ नष्ट करने
से कितनी हानियां दुःख और अन्त मे जीवन नष्ट करना पड़ता है।