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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

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पृष्ठ 47

१० भूमिका

जिस प्रकार सती अपने प्रिय पति से प्रेम करती थीं उससे
कहीं अधिक शिव जी का प्रेम सती पर था। शिवजी ने ससुर
के यहाँ पहुँच कर राजा दक्ष की यज्ञशाला में जाकर देखा, हवन
कुण्ड से हवन की सुगन्धि की जगह रक्त और मांस जलने की
दुर्गन्ध आरही थी। राजा दक्ष का शरीर अनेक टुकडों मे इधर उधर
पड़ा हुआ था। राज महलो से हाहाकार की आवाज आरही थी।
शिवजी को अपनी पत्नी सती के मृत शरीर को देखकर बड़ा
दुख हुआ। शिवजी ने अपनी प्यारी पत्नी का मृत शरीर उठाकर
अपने कंधे पर रखलिया और सती के शोक में पागल के समान
पहाड़ो की कंदराओ में फिरने लगे। शिवजी को अपनी प्यारी
पत्नी सती से इतना स्नेह था कि वे उसके मृत शरीर को छोड़ना
ही नही चाहते थे। मृत शरीर को ही देख देखकर उन्हें कुछ
सन्तोष सा होता था।
शिवजी रातदिन सती के मृत शरीर को लिये फिरते थे।
ससार के सभी कार्य भूल कर केवल सती के शरीर को खिलाते
रहते थे और सती के मुख का दर्शन कर संतोप करते थे। शिवजी
के इस प्रकार से रहने से देवताओं को बड़ी चिंता हुई परंतु किसी
का साहस नही था कि शिवजी के पास आकर सती के मृत शरीर को
शिवजी से अलग कराता। इसलिये सब देवताओं ने सभा करके
यह निश्चय किया कि जब तक शिवजी से सती का मृत शरीर
अलग न किया जावेगा तब तक शिव जी का चित्त शांत न
होगा। इस प्रकार सती के शरीर को देवो ने शस्त्रो से टुकड़े टुकड़े
कर डाला। सैकड़ो टुकड़े करके अनेक स्थानों मे भेज दिया जहां