विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसती और शिव का दाम्पत्य प्रेम ६
कुछ नहीं होसकता, तेरी मृत्यु से ही उस अधम निर्लज्ज शिवका
मेरा सम्बन्ध नष्ट होगा तभी तेरा अपराध क्षमा होगा।
सती को पति के लिये "अधम" शब्द पिता के मुख से
सुनकर इतना अधिक दुःख और हृदय को कष्ट हुआ कि वे मरने
मे तय्यार होकर पितासे कहने लगी—पिता जी! यदि आपको मेरे
प्राणान्त से ही संतोष हो तो मैं तय्यार हूं, मेरे मरने से ही आप
मेरा अपराध क्षमा करने के अभिलाषी है तो मै आपकी आज्ञा
पालन करने को तय्यार हूं।
राजा दक्ष के मुह से एक शब्द भी नहीं निकला। सती
यज्ञशाला मे पद्मासन लगाकर बैठ गई। अपने गेरुवे कपडो
से, जो पहिने थी अपने मुख आदि समस्त शरीर को ढक लिया।
बात की बात मे सती के शरीर से एक प्रचण्ड अग्नि की लपट
निकलकर आकाश मे विलीन होगई। इस भयानक दृश्य को देखकर
यज्ञशाला के सभी ऋषि मुनि आदि अवाक् रहगये। सबके हृदय
दुःख से भर गये। सती के शरीर का अंत होते ही शिवजी के गणो
को यह समाचार मालूम हुआ। उन्होने आकर राजा दक्ष के शरीर
को, यज्ञशाला और राजमहल आदि को नष्ट कर दिया।
सती की मृत्यु का दुःखदाई समाचार पाकर शिवजी को
अपनी प्रिय पत्नी के विछोह का जो दुःख हुआ वह लिखकर सम-
झाना कठिन है। सती का अपने पति शिव जी पर जैसा प्रेम
था उसकी प्रशसा करना व्यर्थ है। पाठक पाठिकाये इसी घटना से
स्वयं समझले कि पिता के मुह मे पति की निन्दा सुनकर सती ने
अपने प्राण त्याग दिये, इससे अधिक प्रेम और क्या होसकता है।