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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३१७
प्राचीन विद्याभ्यास का ढंग
प्राचीन काल मे चौवीस वर्ष की आयु तक अच्छे २ शिक्षको
की देख रेख तथा निगहवानी से विद्याभ्यास कराया जाता था
और दुनियादारी के व्यवहार की वासना वालको के ऊपर असर
न करे इस निमित्त वालकों के पढ़ने के स्थान शहर या गाव से
थोडी दूर साफ हवा और पानी की जगह मे वनाये जाते
थे । जव वालक विद्याभ्यास कराने योग्य होता था तव उसके
मां वाप अथवा अन्य रक्षक उस वालक को शिक्षक की रक्षा मे
करदेते थे । उस समय मे वालक की शारीरिक सपत्ति का नाश
न हो इस वात का ध्यान रख विद्याभ्यास शुरू कराया जाता
था। विद्याभ्यास के लिये वालकों को शिक्षको के सुपुर्द कर देने
पर वहुत जरूरी कारण होने पर भी उनके मा वाप से वालको
की भेट नही होती थी कि जिनके समागम से उनके मन में
ससार की वासनाओ का अंकुर पैदा हो, ऐसे दुष्ट और दुराचारी
मनुष्यों की सोहवत मे बैठने का मौका उन वालको को कहां
मिलता था । उन विद्यालयो मे केवल नीति और धर्म सम्वन्धी ही
पुस्तके पढ़ाई जाती थी, नीति ज्ञान और धर्म सम्वधी उत्तमोत्तम
पुस्तको के सिवाय जिससे अनीत और इश्कवाजी की तरफ
उनका मन जाय अन्य पुस्तको की ओर उनकी दृष्टि भी नहीं
जाती थी । इसतरह से वालक थोड़े समय मे वहुत कुछ
अभ्यास कर लेते थे क्योकि दूसरी वातों मे वे अपना मन लगा