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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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३१८ आनन्द मन्दिर
न पाते थे । ब्रह्मचर्य पूर्वक केवल विद्याभ्यास में ही लवलीन रहने
वाला बालक बहुत दिन का काम थोड़े दिन में कर सकता है।
इस तरह से दी हुई शिक्षा का प्रभाव बहुत अच्छा होता
था इतना ही नही किन्तु विद्यार्थी के अन्तःकरण से जन्म
भर विद्या के संस्कार नही भूलते थे और विद्यार्थी की शारी-
रिक तथा मानसिक संपत्ति ऐसी अच्छी तरह से दृढ़ हो जाती
थी कि विद्याभ्यास के पीछे वह जो २ काम करता था उसमे
साधारणतः ही सफलता पाता था । कठिन से कठिन कार्य उसके
मार्ग में रोड़े न अटका पाते थे ।
आज कल का विद्याभ्यास
वर्त्तमान काल मे विद्याभ्यास का ढंग बड़ा ही उलटा देखने
में आता है । आजकल एक तो बालकों की शारीरिक दशा पर
बिलकुल ध्यान न देते हुये जल्दी पढ़ाने के लोभ से धैर्य न रखने
वाले माता पिता अपने बालको को आवश्यकीय खेल कूद के
आनन्द से या जिससे बालको की शारीरिक संपत्ति स्थिर होती
है ऐसे कामों से अलग रख उन्हे छोटी ही उमर में पाठशाला में
ढकेल देते हैं । ऐसा बहुधा देखा जाता है कि छोटे २ बालको
को उनकी इच्छा के विरुद्ध पाठशाला मे भेजने के कारण
पढ़ने के नाम से उनको डर लगने लगता है, और विद्या तथा
गुरु की ओर वास्तविक में जो बालकों को पूज्य दृष्टि से बर्ताव
रखना चाहिये सो उसके बदले उनकी ओर अरुचि उत्पन्न होजाती