सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

पृष्ठ 460, कुल 704 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 460

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३१३
ब्रह्मचर्य के अमूल्य गुण
ऊपर कहे हुए आठ प्रकार के ब्रह्मचर्य का यथार्थ पालन करने
मे पुरुष के पके हुए वीर्य का ठीक उमर मे व्यय होता है केवल
ऐसाही नहीं, परन्तु बहुत दिन तक रोका हुआ वीर्य पुरुष के बल,
बुद्धि, वर्ण, कांति को बढ़ाकर शरीर के अंगों को मजबूत करता
है और आत्मा को आनन्द का अनुभव कराते हुए दुनियादारी के
कामों में उत्साह देकर लम्बी आयुष्य देता है। इससे उलटी रीति
से यदि मनुष्य अपने वीर्य को बिना पके हुए उसका खर्च करने
लग जाता है तो उस दशा मे शरीर की नसे शिथिल होजाती
हैं, मन बेचैनी मे रहता है, कामकाज मे नहीं लगता है और अन्त
में जिन्दगी के बिगड़ने से मनुष्य मौत के पंजे मे फंस जाता है।
प्राचीन काल में ब्रह्मचर्य
प्राचीन काल मे ब्रह्मचर्य पालन के साथ विद्याभ्यास होता था
और यह रिवाज जितना फैला हुआ था उतनी ही देश की स्थिति
उन्नत थी परन्तु समय के फेर मे जैसे जैसे ब्रह्मचर्य का लोप
होता गया वैसे वैसे देश की बहुत ही हीन अवस्था होने लगी।
प्रचीन काल मे स्त्रियां १६ वर्ष तक और पुरुष २४ वर्ष तक अष्ट-
विध ब्रह्मचर्य का पालन करते थे और कितने ही के ४८ वर्ष
तक ब्रह्मचर्य पालने के उदाहरण मिलते हैं। इसका इतिहास से
पता चलता है। परन्तु दुःख है वह समय चला गया, अब तो
आठ या दस वर्ष की उमर के बालक बालिकाओं का विवाह