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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 456

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३११
शरीर रक्षा
इस जगत में अपने शरीर की रक्षा करना प्रत्येक मनुष्य का
पहिला काम है क्योंकि शरीर की रक्षा से मनुष्य जो जो काम
करना चाहता है वह कर सकता है। शरीर की रक्षा के लिये
आयुर्वेद मे कहे हुए नियमो के ज्ञान की और उन नियमो के
अनुसार बरतने की बहुत आवश्यकता है। कारण कि वैद्यक शास्त्रो
में कहे हुए नियमों के जानने के सिवाय और उनके बरतने के
सिवाय और किसी तरह से शरीर की रक्षा नही हो सकती।
आयुर्वेद में शरीर की रक्षा के निमित्त बहुत से नियम देखने
में आते हैं परन्तु उन सब मे ब्रह्मचर्य हो मुख्य होने से उसका
वर्णन इस पुस्तक मे भी कुछ किया गया है। ब्रह्मचर्य का
ठीक ठीक पालन करने से वीर्य की रक्षा होती है और वीर्य की
रक्षा से शरीर की रक्षा होती है इसलिये पहिले ब्रह्मचर्य के
सामान्य स्वरूप और उसके प्रकार जानने की जरुरत है।
ब्रह्मचर्य का सामान्य स्वरूप
मन को स्त्री के ख्यालात से दूर रखना, स्त्रियों के साथ बात-
चीत न करना, काम विकार के नेत्रों से उनकी ओर न देखना,
और शरीर से उनका स्पर्शमात्र भी न करना यह ब्रह्मचर्य का
साधारण स्वरूप है।
यह ब्रह्मचर्य आठ तरह का है। जो पुराने समय में लगभग
आठ वर्ष से चौबीस वर्ष की आयु तक विद्याभ्यास के साथ ही