विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३१२ आनन्द मन्दिर
साथ पालन किया जाता था। जब अच्छी तरह से आठों प्रकार का
ब्रह्मचर्य पालने मे आता था तब चौबीस वर्ष की उमर तक पुरुष
अपने वीर्य को रोक लेते थे और किसी तरह की काम वासना के
अभाव से उन दिनों पुरुषो का वीर्य उस बड़ी उमर में जाकर
पकता था, परन्तु आज काल के समय मे प्रथम कहे हुए ब्रह्मचर्य
का यथार्थ पालन नहीं होने से पुरुष के वीर्य का नाश लगभग
१०-१२ वर्ष की उमर से ही शुरू हो जाता है।
बिना पके हुए कुछ वीर्य के निकलन से ही मनुष्य के वल
बुद्धि, पराक्रम, उत्साह, तेज, स्मरण शक्ति ( याददास्त ) इत्यादि
नाश होते है और दूसरे कितने ही भयकर रोग लगजाते हैं।
इसीलिये ससार सुख, आरोग्यता और बड़ी आयु चाहने वाले
पुरुषों को ब्रह्मचर्य अवश्य ही पालन करना चाहिये।
ब्रह्मचर्य के आठ प्रकार
ब्रह्मचर्य के आठ भेद हैं जिसका वर्णन मैं नीचे लिखती हूँ।
( १ ) स्त्रियो की याद न करना, ( २ ) स्त्रियों के गुण का
वर्णन न करना, ( ३ ) स्त्रियों के साथ रमण न करना, ( ४ )
स्त्रियो को काम की दृष्टि से न देखना, ( ५ ) स्त्रियों के साथ
अकेले में चुप चाप बात न करना, ( ६ ) स्त्री सम्बन्धी कल्पना
मन मे न लाना, ( ७ ) स्त्रियों के सम्बन्ध मे किसी प्रकार का
मिलने वगैरह का निश्चय न करना और ( ८ ) स्त्रियों से शारीरिक
संग न करना।