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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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पृष्ठ 454

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ३०६
होता है, वैसा ऋतुओं के परिवर्तन से नहीं होता है और उपरोक्त
दोष आदिको मे परस्पर ऐसा दृढ़ संबन्ध है कि दोष के बिगड़ने
से अग्नि आदि भी बिगड़ जाती हैं और मनुष्य नाना प्रकार के
रोगों से ग्रसित हो जाता है इसलिये इनको आरोग्य शास्त्र के
अनुसार समभाव पर रखने का निरंतर यत्न करना चाहिये,
तभी मनुष्य आरोग्य रह् सकता है ।
मिथ्या आहार विहार
मिथ्या आहार विहार के विषय मे संक्षेप से वर्णन किया
जाता है जिससे मनुष्य मात्र मे रोग फैले हुए हैं। बात यह है कि
स्नान, कसरत, स्त्री संग आदि यावत् विहार लोग अपनी शक्ति
से अधिक करते हैं अथवा शक्तिमान होकर भी जो नही करते
उसी को मिथ्या विहार कहना चाहिये ।
उदाहरणार्थ.—घण्टों तक स्नान करना या परिश्रम करने
के पश्चात् तत्काल ही स्नान करना अथवा दिन मे कई बार स्नान
करना, जैसा कि कोई कोई मल मूत्रोत्सर्ग के पश्चात् भी किया
करते हैं। यह शक्ति से अधिक स्नान हुआ और स्नान करना ही
नहीं यह शक्तिमान होकर भी न करना है। इसी प्रकार कसरत
आदि में भी जानना चाहिये । सम्प्रति संपूर्णा प्रकार के मिथ्या
विहारों मे अनैसर्गिक उपायो से शुक्र ( जो शरीर का राजा है।
जैसे प्रान्तिक राजाओं के विनाश से अनेक शत्रु उस प्रान्त
में अशान्ति फैला देते है उसी प्रकार वीर्य नाश से इस शरीर