विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३०८ आनन्द मन्दिर
इसका अर्थ यह होता है कि संसार में इस लोक और पर-
लोक का सुख चाहने वाले बुद्धिमान पुरुषो को आहार के उत्तम
प्रभाव भूत अपने वीर्य की सब तरह से रक्षा करनी चाहिये
क्योकि वीर्य का क्षय होने से अनेक रोग पैदा होते हैं और अन्त
मे कम अवस्था मे ही मृत्यु हो जाती.है।
इसलिये मनुष्य मात्र को अपने जीवन सुधार और मनुष्य
जीवन का सच्चा सुख प्राप्त करने के लिये ध्यान रखना चाहिये।
आरोग्यता के लक्षण
आरोग्यता के लक्षण आयुर्वेदाचार्य धन्वन्तरी के शिष्य
सुश्रुत जी ने इस प्रकार लिखे हैं “जिस मनुष्य का दोष वात,
पित्त, कफ, अग्नि, जठराग्नि, धातु, रस, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा,
शुक्र, मल विष्टा, मूत्र, पसीना आदि की क्रिया सम अर्थात्
यथार्थ भाव पर हो, और जिसकी आत्मा तथा मन प्रसन्न हो उसको
आरोग्य कहते हैं। यदि उपरोक्त वात, पित्त आदि दोषो की
असमानता और आत्मादि की अप्रसन्नता हो तो रोग कहते हैं।
एक जगह लिखा है कि “रोगस्तु दोष्यम्” दोष यद्यपि ऋतुओ के
परिवर्तन और हीन मिथ्या अति योग से जैसे कि वर्षा ऋतु मे
जल का न पड़ना यह हीन योग कहा जाता है, उसी ऋतु मे
शीत का होना यह मिथ्या योग और वर्षा का अधिक होना यह
अतियोग कहा जाता है। ऐसे योग असमान होकर रोगोत्पत्ति करते
हैं। तथापि जैसा बिगाड़ हम लोगो के मिथ्या आहार बिहार द्वारा