विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३०० आनन्द मन्दिर
अठारहवां कारण
गर्भ रहजाने पर गर्भवती नियम पूर्वक नहीं रहती। आहार
विहार का नियम ठीक नही रखती इस कारण सन्तान होते
समय कष्ट भी अधिक होता है और सन्तान भी रोगी होती है तथा
कम अवस्था मे ही मरजाती है।
उन्नीसवां कारण
बालक होते समय मूर्खा दाइयों की असावधानी से बालक
की ठीक सम्हाल नहीं होतो इस कारण बहुधा जच्चा और बच्चा
दोनों के प्राण संकट मे पड जाते हैं। बहुततेरे बालक सोवर मे ही
काल का कलेवा बनजाते हैं और जच्चा को भी बडा कष्ट होता है
दाई की असावधानी और मूर्खता से प्राय जच्चा को प्रसूत रोग
होजाता है और भी अनेक प्रकार के गर्भाशय के रोग उत्पन्न
होजाते हैं। प्रसूत रोगवाली स्त्री के सन्तान तो बराबर होती
जाती है परन्तु वह रोगी और निर्बल दुर्बल होती है।
प्रसूत रोग अधिक दिन का होजाने से तपेदिक का रूपधा-
रण करती है और ठीक इलाज न होने से वह स्त्री जीवन लीला
समाप्त करजाती है। तपेदिक वाली रोगी स्त्री के भी सन्तान
होती है परन्तु वह भी इसी प्रकार के रोगों से ग्रसित रहती है।
और अन्त को तपेदिक के रोग से ही मरती है। विषयी पुरुष
इस बातकी कुछ भी परवाह नही करते। स्त्री को कुछ भी रोग हो
वे अपनी विषय वासना की तृप्ति करने में मस्त रहते हैं।