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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र २६५
नवाँ कारण
सैकड़ा पीछे निन्यानवे पुरुषो को शीघ्रपात और सुस्ती की
बीमारी है। पुरुष तो गर्भाधान क्रिया के समय शीघ्रही शक्तिहीन
होजाते हैं। स्त्री की इच्छा रहजाती है वह तय्यार तक नही होने
पाती। पती जी की नानी मर जाती है, फिर भला सन्तान आरोग्य
कैसे हो। ऐसी दशा में गर्भ रहता ही नहीं, यदि वर्षों गर्भाधान
क्रिया करते रहने से कभी धोखे में स्त्री की इच्छा पूरी हुई और
वह भी स्खलित हुई और रज तथा वीर्य मिलकर गर्भ रह गया
तो ऐसी दशा मे सन्तान रोगी निर्वल दुर्बल और कम आयु
वाली होती है।
दसवां कारण
पुरुषों को शीघ्रपात की शिकायत है ओर वे स्तम्भन वटी
खाकर सिथिलता के लिये तिला आदि का सेवन कर किसी
प्रकार गर्भाधान क्रिया के लिये तय्यार हुए और बडे उद्योग से
कुछ देरी तक ठहरे उसी समय स्त्री की भी इच्छा धोखे से होगई
तो गर्भ रह गया। उस समय की गर्भाधान क्रिया से यदि गर्भ
रहा तो गर्भस्राव व गर्भपात होजाता है,। यदि भाग्यवश बालक
हुआ भी तो रोगी निर्वल और दुर्बल होता है। मेरे पास
ऐसी स्त्रियों और पुरुषो की चिट्ठियां महीने मे सैकड़ो हजारों
आया करती हैं। जिनके पति को शीघ्रपात की तथा सुस्ती