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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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३६४ आनन्द मन्दिर

है चक्कर लगाता है। जब कबूतरी प्रसन्न होकर गर्भाधान क्रिया के
लिये तय्यार होती है तब सभोग करता है । इस प्रकार कभी
खाली नहीं जाता उसकी गर्भाधान क्रिया व्यर्थ नही जाती ।
इसीप्रकार सब पशु पक्षी मादा की इच्छा उत्पन्न करके गर्भाधान
क्रिया करते है । खरगोश घंटों मादा के साथ किलोलें करता है तब
वह गर्भाधान क्रिया के योग्य होती है फिर रतिक्रिया करता है ।
ऊपर लिखा प्रकृति का नियम है इस नियम के विरुद्ध जो
रतिक्रिया करता है वह पशु पक्षियो से भी कम बुद्धिवाला है ।
यही कारण है जो सन्तान जन्म से ही रोगी निर्बल और दुर्बल
होती है क्योकि स्त्री की इच्छा के विरुद्ध गर्भाधान क्रिया होती है।
आठवां कारण
पुरुष अपनी विषय वासना की पूर्ति के लिये नाना प्रकार
से उलटे सुलटे टेढे तिरछे होकर रतिक्रिया करते हैं और समझते
हैं कि इस प्रकार करने से और भी अधिक आनन्द मिलेगा, परन्तु
यह उनकी मूर्खता है। इस प्रकार करने से स्त्री के गर्भाशय को बडी
भारी हानि पहुँचती है, गर्भाशय मे सूजन टेढापन तिरछापन हो
जाता है, गर्भाशय बाहर निकल आता है। गर्भाशय के बन्धन ढीले
होकर अनेक प्रकार की खराबिया आजाती हैं। उनसे स्त्रियो को बडा
कष्ट होता है । यदि इस दशा मे गर्भ रहगया तो बालक रोगी
निर्बल दुर्बल और कम आयु वाला होता है । यही कारण हमारे
देश के बालकों की रोगी तथा मृत्यु संख्या अधिक होने का है ।