विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)
Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha
विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८२ आनन्द मन्दिर
तब तक इस नपुसक पुरुष की इन्द्रि स्त्री प्रसग करने योग्य नही
होती। इस नपुसक का इसी कारण दूसरा नाम मुख योनि कहा है।
पाठको ? देखा आपने, कैसी घृणा की बात है, कैसे दुःख
की बात है। ऐसा कौन मूर्ख पुरुष होगा जो ऐसी सन्तान उत्पन्न
करना चाहेगा इसलिये सबको ध्यान रखना चाहिये कि जब
तक पति पत्नी का रज वीर्य ठीक न हो, किसी प्रकार की खराबी
हो, तब तक गर्भाधान क्रिया अर्थात् स्त्री प्रसग नही करना चाहिये।
जो स्त्री पुरुष नियम विरुद्ध सभोग करके रज वीर्य से क्षीण
होगये हैं उन्हे ब्रह्मचर्य का पालन करके इस पुस्तक मे लिखे
अनुसार औषधियो का सेवन करके रजवीर्य को शुद्ध करके तब
सभोग करना चाहिये ।
सौगंधिक नपुंसक
यः पूतियोनौजायेत स सौगंधिक संज्ञितः ।
सयोनिशेफसोगन्धमाघ्रायलभते बलम् ॥
इसका अर्थ यह है कि जिस स्त्री की योनि मे दुर्गंधि आती
हो उसके सभोग से जो गर्भ रहकर पुत्र उत्पन्न होता है वह
सौगंधिक नपुसक कहलाता है, यह नपुसक पुरुष जब स्त्री की
योनि और पुरुष की इन्द्री को सूघे तब उसकी इन्द्री चैतन्य
होती है उत्तेजित होती है । इस नपुसक का दूसरा नाम नाशा
योनि कहा है।