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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र २८१
समय गर्भ रहे तो हृष्ट पुष्ट और बलिष्ठ रूपवती कन्या गर्भ
में आवेगी ।
यह वात मैं पीछे लिख चुकी हूं कि कामशास्त्र वैद्यकशास्त्र का
ही एक अङ्ग है उसका तात्पर्य यह कदापि नहीं हो सकता कि
निर्बल दुर्बल हीनाङ्ग और नपुंसक सन्तान होने का साधन वतलावे ।
यह विषयी लोगो ने अपने आनन्द के लिये वना लिया है ।
नपुंसकों की उत्पत्ति
पित्रो रत्यल्पवीर्य्यत्वादासेव्याःपुरुषो भवेत् ।
सशुक्रंप्राश्यलभतेध्वजोच्छ्रायमसंशयम् ॥
इसका अर्थ यह है जिन दम्पतियो का अधिक प्रसंग के
कारण रज वीर्य क्षीण होगया है ऐसे अत्यन्त क्षीण वीर्य वाले
माता पिता के संयोग से जो गर्भ रहता है उससे आसेव्य नामक
नपुंसक उत्पन्न होता है ।
आसेव्य नपुंसक
पुरुष सभोग करने की शक्ति नहीं रखता जव वह अपने
मुख मे दूसरे के मैथुन करने से स्खलित वीर्य को भक्षण करे
तव उसकी इच्छा सम्भोग करने की होती है अर्थात् उसे उत्तेजना
उत्पन्न होती है ऐसा आयुर्वेद का मत है ।
आसेव्य नपुंसक जव तक किसी वलवान पुरुष से अपने
मुख में मैथुन न करावे और उसका स्खलित वीर्य भक्षण न करे